भारत सरकार ने Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले NGO, ट्रस्ट, सोसाइटी और सेक्शन 8 कंपनियों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय निगरानी को और मजबूत करना है। यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो विदेशी अनुदान प्राप्त करने और उसके उपयोग से संबंधित कई महत्वपूर्ण नियम बदल सकते हैं।
FCRA क्या है?
FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) भारत का वह कानून है, जिसके तहत विदेशी स्रोतों से प्राप्त होने वाले धन (Foreign Contribution) को नियंत्रित किया जाता है। कोई भी NGO, ट्रस्ट, सोसाइटी या सेक्शन 8 कंपनी विदेश से दान या अनुदान प्राप्त करना चाहती है, तो उसे गृह मंत्रालय (MHA) से FCRA पंजीकरण या पूर्व अनुमति (Prior Permission) प्राप्त करनी होती है।
प्रस्तावित बदलाव क्या हैं?
सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधनों में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं:
1. विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर अधिक निगरानी
यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द, समाप्त या नवीनीकृत नहीं होता, तो विदेशी अनुदान से बनाई गई संपत्तियों और अप्रयुक्त धन के प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण (Designated Authority) को अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है।
2. उद्देश्य और भौगोलिक क्षेत्र स्पष्ट करना होगा
संस्थाओं को यह स्पष्ट बताना होगा कि विदेशी धन किस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा और किन राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
3. पारदर्शिता और रिपोर्टिंग बढ़ेगी
विदेशी फंड के उपयोग, परियोजनाओं, गतिविधियों और वित्तीय विवरणों की रिपोर्टिंग एवं रिकॉर्ड रखने के नियम अधिक सख्त किए जाने का प्रस्ताव है।
4. अनुपालन (Compliance) पर विशेष जोर
NGO को समय-समय पर आवश्यक दस्तावेज, वार्षिक रिटर्न और वित्तीय जानकारी निर्धारित प्रारूप में जमा करनी होगी। नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की जा सकती है।
NGO पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यदि प्रस्तावित संशोधन लागू होते हैं, तो:
- विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्थाओं पर निगरानी बढ़ेगी।
- पंजीकरण और नवीनीकरण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
- वित्तीय रिकॉर्ड और अनुपालन पर अधिक ध्यान देना होगा।
- छोटी संस्थाओं के लिए प्रशासनिक और अनुपालन संबंधी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही विदेशी फंड के दुरुपयोग को रोकने और नियामकीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना भी इसका उद्देश्य है।
ध्यान देने योग्य बात
ये बदलाव अभी प्रस्तावित (Proposed) हैं। अंतिम नियम संसद में विधेयक पारित होने और संबंधित अधिसूचनाएं जारी होने के बाद ही लागू होंगे। इसलिए FCRA के अंतर्गत पंजीकृत संस्थाओं को आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
मुख्य बिंदु
- FCRA नियमों में बड़े संशोधन प्रस्तावित।
- विदेशी फंड और उससे बनी संपत्तियों पर कड़ी निगरानी का प्रस्ताव।
- पंजीकरण, नवीनीकरण और अनुपालन के नियम हो सकते हैं अधिक सख्त।
- NGO को उद्देश्य और कार्यक्षेत्र स्पष्ट करना पड़ सकता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर सरकार का जोर।
- अंतिम नियम लागू होने से पहले संसद और सरकार की अधिसूचना आवश्यक होगी।





