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बहुत से लोग समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं — एक स्कूल, एक अस्पताल, महिलाओं या बच्चों के लिए काम, पर्यावरण, या गाँव का विकास। और अक्सर उनके मन में एक ही सवाल होता है: “NGO कैसे शुरू करें, और सरकारी या CSR अनुदान (grant) कैसे मिलेगा?”
सच ये है कि NGO सिर्फ रजिस्टर करा लेना काफी नहीं है। अनुदान तक पहुँचने का एक पूरा रास्ता है, और उस रास्ते के कई पड़ाव हैं — Trust या Society का रजिस्ट्रेशन, फिर 12A, फिर 80G, फिर NITI Aayog। हर पड़ाव अगले का दरवाज़ा खोलता है।
इस पोस्ट में हम वही पूरा रास्ता समझेंगे — शुरुआत से अनुदान तक, कदम दर कदम।
सबसे पहला फैसला — आपका NGO किस रूप में बनेगा। आम तौर पर दो रास्ते होते हैं:
Trust (न्यास) — कुछ लोग (ट्रस्टी) मिलकर एक ट्रस्ट डीड बनाते हैं। अपेक्षाकृत सरल, और परिवार या छोटे समूह द्वारा चलाए जाने वाले NGO के लिए अच्छा।
Society (सहकारी/पंजीकृत संस्था) — Societies Registration Act के तहत, सदस्यों का एक समूह, चुनी हुई कार्यकारिणी के साथ। ज़्यादा लोकतांत्रिक ढाँचा, बड़े और सदस्य-आधारित NGO के लिए।
(तीसरा रास्ता Section 8 Company भी है — कंपनी के रूप में NGO — पर वो अलग विषय है।)
कौन सा सही है, ये आपके उद्देश्य, आकार और चलाने के तरीके पर निर्भर करता है। गलत रूप चुनना बाद में महँगा पड़ता है।
संस्था बन गई, पर अभी वो टैक्स की नज़र में एक आम इकाई है। 12A रजिस्ट्रेशन वो कदम है जो आपकी संस्था को आयकर से छूट दिलाता है — यानी NGO की आमदनी पर टैक्स नहीं लगता, बशर्ते वो सही उद्देश्य के लिए इस्तेमाल हो।
बिना 12A, आपका NGO अपनी आमदनी पर टैक्स भर सकता है, और यही पैसा समाज के काम में लग सकता था। इसलिए 12A लगभग हर गंभीर NGO के लिए ज़रूरी पहला वित्तीय कदम है।
अब बात दानदाता की। 80G रजिस्ट्रेशन वो है जो आपके NGO को दान देने वाले को आयकर में छूट दिलाता है।
इसका असर सीधा है — जब किसी दानदाता को पता होता है कि उसके दान पर उसे टैक्स छूट मिलेगी, तो वो ज़्यादा और आसानी से दान देता है। कंपनियाँ और बड़े दानदाता अक्सर सिर्फ उन्हीं NGO को देते हैं जिनके पास 80G है।
यानी 12A आपके NGO को बचाता है, और 80G आपके NGO को दान दिलाता है।
अगर आप सरकारी अनुदान या सरकारी योजनाओं के साथ काम करना चाहते हैं, तो NITI Aayog के NGO Darpan पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। यहाँ से आपको एक Unique ID मिलती है।
बिना NGO Darpan की ID, ज़्यादातर सरकारी अनुदान और कई CSR फंडिंग के दरवाज़े बंद रहते हैं। ये वो पहचान है जो सरकार और बड़े दानदाता माँगते हैं।
अब आप उस जगह पहुँचते हैं जहाँ ज़्यादातर लोग शुरू से पहुँचना चाहते थे — अनुदान। सरकारी योजनाएँ, CSR फंडिंग, और दूसरे grant अक्सर तभी मिलते हैं जब पिछले सारे पड़ाव पूरे हों:
अनुदान देने वाले सिर्फ रजिस्ट्रेशन नहीं देखते — वो देखते हैं कि आपका काम असली है, आपके दस्तावेज़ पूरे हैं, और आप पैसे का सही हिसाब रख सकते हैं। यहीं एक अच्छे प्रोजेक्ट प्रस्ताव और साफ रिकॉर्ड की भूमिका आती है।
पूरा रास्ता न समझना। सिर्फ Trust रजिस्टर करा लेते हैं, और सोचते हैं अनुदान मिल जाएगा। पर 12A, 80G, NGO Darpan के बिना दरवाज़े बंद रहते हैं।
गलत क्रम। हर कदम अगले के लिए आधार है। गलत क्रम में चलने से समय बर्बाद होता है।
कमज़ोर दस्तावेज़। ट्रस्ट डीड या उपविधि में उद्देश्य साफ न लिखना — बाद में 12A/80G और अनुदान में दिक्कत।
हिसाब-किताब की अनदेखी। अनुदान पाने के बाद उसका सही हिसाब और रिटर्न ज़रूरी है। ये चूकने पर आगे की फंडिंग रुक जाती है।
NGO शुरू करना और अनुदान तक पहुँचना एक सफर है, एक कदम नहीं। Trust या Society से शुरू होकर, 12A, 80G, NITI Aayog से होते हुए, अनुदान तक — हर पड़ाव सही तरीके से पार करना होता है।
अच्छी बात ये है कि ये रास्ता साफ है, और हज़ारों NGO इसे पार करते हैं। बस ज़रूरत है सही क्रम, सही दस्तावेज़, और सही मार्गदर्शन की।
यही हमारा काम है — Trust/Society रजिस्ट्रेशन से लेकर 12A, 80G, NITI Aayog और अनुदान तक की पूरी फाइल, सही क्रम में, पूरे विदर्भ में, बारह साल के अनुभव के साथ।
NGO शुरू करना है या अनुदान तक पहुँचना है? हमें बताइए — आप किस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, और अभी किस पड़ाव पर हैं। हम बता देंगे कि आगे का सही रास्ता क्या है। जवाब का कोई चार्ज नहीं।
कॉल या WhatsApp: +91 77981 86956